प्रयागराज

भारत को किसान राष्ट्र घोषित करने और किसान बोर्ड गठन की मांग तेज

महाकुंभ में जगतगुरु किसानाचार्य स्वामी शैलेन्द्र योगिराज सरकार ने भारत को किसान राष्ट्र घोषित करने और किसान बोर्ड के गठन की मांग रखी। उनका कहना है कि किसान केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि किसान देवता हैं। वह सभी धर्मों और जातियों से ऊपर होते हैं और उनका सम्मान सर्वोपरि है।

किसान देवता की उपेक्षा क्यों हो रही है?

  • फसल का उचित दाम न मिलने से किसान की स्थिति और खराब हो जाती है।
  • ठंड, गर्मी, और बारिश में मेहनत के बावजूद किसान आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।
  • अक्सर खेतों में ठंड, बिजली गिरने या सर्पदंश से किसान की मौत हो जाती है।

किसान राष्ट्र की अवधारणा

स्वामी शैलेन्द्र योगिराज सरकार के अनुसार:

भारत को किसान राष्ट्र घोषित करने और किसान बोर्ड गठन की मांग तेज
  • किसान राष्ट्र घोषित करने से किसानों के लिए एक प्रोटोकॉल तैयार होगा।
  • यह सभी को एक सूत्र में बांधने का माध्यम बनेगा।
  • किसानों को उनकी मेहनत का पूरा हक मिलेगा।
किसान राष्ट्र के लाभविवरण
किसानों की आर्थिक स्थितिफसल का उचित मूल्य मिलेगा
समाज की एकतासभी धर्म और जातियां किसान के माध्यम से जुड़ेंगी
सम्मान का अधिकारकिसान को समाज में सर्वोच्च सम्मान मिलेगा

किसान देवता के सम्मान में पहला मंदिर

योगिराज सरकार ने उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के पट्टी में विश्व का पहला किसान देवता मंदिर बनवाया है। उनका कहना है कि किसान का सम्मान देवी-देवताओं की पूजा जितना ही महत्वपूर्ण है।

किसान राष्ट्र और किसान बोर्ड की मांग क्यों महत्वपूर्ण है

क्या कहते हैं शास्त्र?

  • “अन्न ब्रह्म है”: अन्न से ही जीवन संभव है और अन्नदाता किसान इसके सृजनकर्ता हैं।
  • शास्त्रों में उल्लेख है कि अन्न से ही जीवन की प्राणशक्ति संचालित होती है।

देश की 70% आबादी गांवों में

भारत एक कृषि प्रधान देश है। देश की 70% आबादी गांवों में रहती है, और भारत की आत्मा किसान में बसती है। इसीलिए, किसान राष्ट्र और किसान बोर्ड का गठन भारत के विकास में मील का पत्थर साबित होगा।

निष्कर्ष

किसान केवल एक पेशा नहीं, बल्कि देश की रीढ़ हैं। उनका सम्मान और अधिकार सुनिश्चित करना हमारा नैतिक कर्तव्य है। किसान राष्ट्र और किसान बोर्ड के गठन से किसानों को उनकी पहचान और हक मिलेगा।

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