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#UPPSC_No_Normalization: UPPSC की Normalization प्रणाली के खिलाफ छात्रों का फूटा गुस्सा, सड़कों पर गूंजा “इंसाफ़ चाहिए!”

#UPPSC_No_Normalization: UPPSC की Normalization नीति पर उबाल, छात्र बोले- “हक़ के लिए करेंगे संघर्ष!”

#UPPSC_No_Normalization: UPPSC की Normalization प्रणाली के खिलाफ छात्रों का फूटा गुस्सा, सड़कों पर गूंजा "इंसाफ़ चाहिए!"

उत्तर प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन (UPPSC) की परीक्षाओं में Normalization प्रक्रिया के खिलाफ प्रदेशभर के प्रतियोगी छात्र सड़कों पर उतर आए हैं। आज हुए विरोध प्रदर्शन में छात्रों ने अपने नाराजगी भरे नारे और तख्तियों के माध्यम से UPPSC से इस प्रक्रिया को हटाने की मांग की। छात्रों का कहना है कि Normalization प्रणाली उनकी मेहनत के प्रति अन्यायपूर्ण है और इसे तुरंत बंद किया जाना चाहिए।

क्या है Normalization और क्यों है विवाद?

Normalization का उद्देश्य होता है विभिन्न परीक्षा शिफ्टों के कठिनाई स्तर को संतुलित करना, ताकि सभी छात्रों को समान अवसर मिले। लेकिन छात्रों का मानना है कि UPPSC में इस प्रक्रिया का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है। इस कारण कई योग्य छात्रों का स्कोर प्रभावित होता है और मेरिट लिस्ट में उनके नंबर घटते-बढ़ते हैं, जो कई बार अन्यायपूर्ण महसूस होता है।

छात्रों के अनुसार क्या हैं Normalization के नुकसान?

छात्रों ने Normalization के खिलाफ कई मुख्य समस्याएं बताई हैं:

  1. असमानता: कुछ छात्रों का कहना है कि कठिन पेपर वाले शिफ्ट के उम्मीदवारों का स्कोर बढ़ जाता है, जबकि सरल पेपर के छात्रों का स्कोर अपेक्षाकृत कम हो जाता है, जिससे वास्तविक स्कोरिंग प्रभावित होती है।
  2. पारदर्शिता की कमी: छात्रों का आरोप है कि UPPSC की Normalization प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है, जिससे छात्रों का भरोसा आयोग पर से उठता जा रहा है।
  3. योग्यता पर असर: छात्रों का मानना है कि यह प्रक्रिया उनकी योग्यता को सही तरीके से नहीं दर्शाती है, और यह उनका भविष्य प्रभावित कर सकती है।

छात्रों की मांगें: Normalization को खत्म करें या सुधार करें

प्रदर्शन में शामिल छात्रों का कहना है कि वे Normalization प्रक्रिया को पूरी तरह से समाप्त करना चाहते हैं या फिर इसे सुधारने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि UPPSC इस पर ध्यान नहीं देता है, तो वे अपनी आवाज और अधिक बुलंद करेंगे और आने वाले दिनों में विरोध प्रदर्शन को और बड़ा करेंगे। कुछ छात्रों ने यह भी कहा कि Normalization के कारण उन्हें असफल घोषित कर दिया गया, जबकि उनके उत्तर सही थे।

सोशल मीडिया पर बढ़ता समर्थन: #UPPSC_No_Normalization ट्रेंड में

सोशल मीडिया पर #UPPSC_No_Normalization हैशटैग तेजी से ट्रेंड कर रहा है। छात्र, प्रतियोगी परीक्षा में शामिल अभ्यर्थी और उनके समर्थक इस हैशटैग के साथ अपने विचार और समस्याएं शेयर कर रहे हैं। छात्रों ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी नाराजगी को व्यापक रूप से साझा किया है, जिससे यह मुद्दा ऑनलाइन और भी बड़ा बन गया है।

UPPSC का क्या कहना है?

वहीं, UPPSC की ओर से इस मुद्दे पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। छात्रों की मांग है कि UPPSC इस प्रक्रिया पर एक स्पष्ट बयान जारी करे और Normalization को लेकर अपनी नीति को सार्वजनिक रूप से साझा करे, ताकि भविष्य में इस तरह की समस्याओं का समाधान हो सके।

छात्रों की उम्मीदें और आगे की रणनीति

यह प्रदर्शन UPPSC परीक्षाओं में Normalization प्रक्रिया पर एक बड़े बदलाव की उम्मीद जगाता है। छात्र चाहते हैं कि UPPSC उनके भविष्य को ध्यान में रखकर निर्णय ले और इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए। छात्रों का यह भी कहना है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे अपनी लड़ाई को और व्यापक स्तर पर ले जाने के लिए तैयार हैं।

#UPPSC_No_Normalization आंदोलन ने सरकारी भर्ती परीक्षाओं में एक बार फिर से निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल खड़ा किया है। देखना यह है कि आयोग इस विषय पर क्या कदम उठाता है और छात्रों की समस्याओं का समाधान करता है या नहीं।

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