महाकुंभ 2025: पुण्य आत्माओं की शांति हेतु जलांजलि व तिलांजलि
प्रयागराज। महाकुंभ 2025 नगर में अखिल भारत वर्षीय धर्म संघ, स्वामी करपात्री फाउंडेशन एवं वैदिक कायाकल्प संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में महाकुंभ 2025 के पावन अवसर पर दिवंगत पुण्य आत्माओं की शांति के लिए विशेष वैदिक अनुष्ठान आयोजित किया गया। धर्मगुरु अनंत विभूषित श्री ब्रह्मानंद सरस्वती जी महाराज एवं पीठाधीश्वर श्री विद्या साधक डॉक्टर गुण प्रकाश चैतन्य जी महाराज की अध्यक्षता में तीर्थराज प्रयाग की पावन भूमि पर कोटेश्वर महादेव के सानिध्य में यह धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ।

महाकुंभ 2025 में 3 करोड़ आहुति के साथ श्री गायत्री महायज्ञ का आयोजन
इस महाकुंभ 2025 में 451 वैदिक विद्वानों द्वारा विश्व कल्याणार्थ श्री गायत्री महायज्ञ में 3 करोड़ आहुतियां दी जा रही हैं। वैदिक कायाकल्प संस्थान के सचिव सुमित गुप्ता ने बताया कि मौनी अमावस्या के दिन ज्ञात-अज्ञात दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए विशेष मंत्रोच्चार के साथ जनसमुदाय द्वारा जलांजलि एवं तिलांजलि दी गई। इस अनुष्ठान का उद्देश्य मृत आत्माओं को मोक्ष प्राप्त कराना एवं सनातन परंपराओं का पालन करना है।
स्वामी करपात्री जी महाराज की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि
महाकुंभ 2025 के मौनी अमावस्या पर हुई घटनाओं पर राजनीतिकरण किए जाने पर धर्मगुरु अनंत विभूषित श्री ब्रह्मानंद सरस्वती जी महाराज ने कड़ा विरोध जताया। उन्होंने सभी सनातन धर्मावलंबियों से पुण्य आत्माओं के मोक्ष हेतु जलांजलि एवं तिलांजलि अर्पित करने की अपील की। इसी अवसर पर स्वामी करपात्री जी महाराज की पुण्यतिथि पर धर्म संघ के संपूर्ण परिकर द्वारा विशेष अनुष्ठान एवं तर्पण किया गया।

इस दौरान सनातनी एकता व अखंडता बनाए रखने का संकल्प लिया गया। धर्मगुरु ने कहा कि धर्म पर राजनीति नहीं होनी चाहिए और सभी को अखंड भारत की संकल्पना को साकार करने का प्रयास करना चाहिए।
2026 में होगा अंतरराष्ट्रीय लक्षचंडी यज्ञ
धर्मगुरु अनंत विभूषित श्री ब्रह्मानंद सरस्वती जी महाराज ने वर्ष 2026 में अंतरराष्ट्रीय लक्षचंडी यज्ञ करने का संकल्प लिया। यह यज्ञ वैश्विक अशांति, जलवायु परिवर्तन, बेरोजगारी और आतंकवाद जैसी समस्याओं के समाधान हेतु किया जाएगा।
लक्षचंडी यज्ञ की महत्ता बताते हुए उन्होंने कहा कि यह यज्ञ माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्ति, समृद्धि, व्यापार में सफलता एवं वैश्विक संकटों से मुक्ति के लिए किया जाता है। इसका उद्देश्य मानवता में प्रेम, सौहार्द और शांति का संदेश फैलाना है।
2035 तक जल संरक्षण हेतु संकल्प यात्रा
पीठाधीश्वर डॉ. गुण प्रकाश चैतन्य जी महाराज ने जल संरक्षण को आवश्यक बताते हुए “जल बचाओ, सृष्टि बचाओ” का उद्घोष किया। उन्होंने कहा कि धर्म संघ से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति को 2035 तक 1,25,000 लीटर जल बचाने का संकल्प लेना होगा।
उन्होंने बताया कि भारत में मीठे पानी की उपलब्धता सीमित है और इसे संरक्षित करना पर्यावरण व भविष्य की पीढ़ियों के लिए आवश्यक है। जल संरक्षण से प्राकृतिक संतुलन बना रहेगा और जल संकट से बचा जा सकेगा।
निष्कर्ष
महाकुंभ 2025 में दिवंगत पुण्य आत्माओं के लिए किए गए वैदिक अनुष्ठान, गायत्री महायज्ञ और तर्पण से सनातनी परंपराओं की अनुपालना हुई। साथ ही, धर्म, समाज और पर्यावरण की रक्षा हेतु भविष्य के संकल्प लिए गए। इस आयोजन ने सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों को सुदृढ़ करने और विश्व शांति हेतु योगदान देने का संदेश दिया।
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