प्रयागराज

संयुक्त परिवार का महत्व: समाज में संस्कारों की नींव

नैनी (प्रयागराज)। चाड़ी गांव में “श्री सुमंगलम” संस्था की ओर से शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में संयुक्त परिवार के महत्व पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने बताया कि एकल परिवार की बढ़ती प्रवृत्ति न केवल पारिवारिक समस्याओं को जन्म दे रही है, बल्कि समाज संस्कारहीन होता जा रहा है, जिसका नकारात्मक असर देश पर भी पड़ेगा।

परिवार ही संस्कारों की पाठशाला: ओम पाल सिंह
परिवार ही संस्कारों की पाठशाला: ओम पाल सिंह

कार्यक्रम में आरएसएस के उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड संयोजक (कुटुंब प्रबोधन) ओम पाल सिंह ने कहा, “मां ही बच्चे को संस्कारवान बनाती है और ऐसे बच्चे ही संस्कारित समाज की नींव रखते हैं।” उन्होंने बताया कि पति-पत्नी दोनों के नौकरी में होने से बच्चों की देखरेख में कमी रह जाती है, इसलिए माताओं को बच्चों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

ओम पाल सिंह ने राम, कृष्ण और शिवाजी जैसे महापुरुषों का उदाहरण देते हुए कहा कि इन्हें भी माताओं से मिले संस्कारों ने महान बनाया। उन्होंने जोर देकर कहा कि कुटुंब का अर्थ केवल परिवार से नहीं, बल्कि पड़ोसी, रिश्तेदार और पूरे समाज को साथ लेकर चलने से है।

परिवार ही संस्कारों की पाठशाला: संयुक्त परिवार का महत्व
परिवार ही संस्कारों की पाठशाला: संयुक्त परिवार का महत्व

कार्यक्रम में न्यायमूर्ति शेखर यादव ने विवाह के बाद बढ़ते तलाक के मामलों पर चिंता जताते हुए कहा कि संयुक्त परिवार में बच्चों को दिए गए संस्कार ही समाज और परिवार में शांति ला सकते हैं। राज्यसभा सांसद साधना सिंह, अशोक उपाध्याय, और इलाहाबाद मंडल आयुक्त विजय विश्वास ने भी इस अवसर पर अपने विचार साझा किए।

इस कार्यक्रम में राधाकांत ओझा, समीर शंकर, पवन श्रीवास्तव समेत कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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