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जनजातीय गौरव दिवस 2024: पीएम मोदी का जोशीला संबोधन और बिहार के जमुई में विकास की नई शुरुआत

15 नवंबर 2024 को बिहार के जमुई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनजातीय गौरव दिवस के कार्यक्रम में हिस्सा लिया। यह दिन भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में मनाया गया। पीएम मोदी ने भगवान बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि देते हुए “भगवान बिरसा मुंडा – अमर रहें” के नारे लगाए।

बिहार के जमुई में बड़े पैमाने पर परियोजनाओं का शिलान्यास

कार्यक्रम में 6,000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया गया। इनमें आदिवासी भाई-बहनों के लिए डेढ़ लाख पक्के घर, बच्चों के लिए स्कूल और हॉस्टल, महिलाओं के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं, और सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने के लिए संग्रहालय शामिल हैं।

जनजातीय गौरव दिवस: पीएम मोदी का जोशीला संबोधन और बिहार के जमुई में विकास की नई शुरुआत
जनजातीय गौरव दिवस: पीएम मोदी का जोशीला संबोधन और बिहार के जमुई में विकास की नई शुरुआत, Image Source: PIB

प्रमुख घोषणाएं और उपलब्धियां

घोषणा/उपलब्धिविवरण
आवास योजना11,000+ आदिवासी परिवारों को नए पक्के घर मिले।
सड़क निर्माणआदिवासी क्षेत्रों में सैकड़ों किलोमीटर लंबी सड़कें बनाई जाएंगी।
शिक्षा और स्वास्थ्यआदिवासी बच्चों के लिए नए स्कूल और हॉस्टल, साथ ही स्वास्थ्य सुविधाओं की शुरुआत।
सांस्कृतिक धरोहर संरक्षणआदिवासी संस्कृति के लिए संग्रहालय और रिसर्च सेंटर का निर्माण।
पीएम जनमन योजना24,000 करोड़ रुपये की योजना से अति पिछड़ी जनजातियों को लाभ।
धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान80,000 करोड़ रुपये की लागत से आदिवासी गांवों का सर्वांगीण विकास।
केंद्रीय ट्राइबल यूनिवर्सिटीआदिवासी बहुल क्षेत्रों में 2 नई यूनिवर्सिटी और 30 मेडिकल कॉलेज स्थापित।
बिरसा मुंडा संग्रहालयरांची में भगवान बिरसा मुंडा के नाम पर भव्य संग्रहालय का निर्माण।

भगवान बिरसा मुंडा के योगदान को सहेजने की पहल

प्रधानमंत्री ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा के नाम पर रांची में संग्रहालय बनाया गया है। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे इस संग्रहालय को देखें और सीखें।

जनजातीय गौरव दिवस के महत्व को बढ़ाते कार्यक्रम

कार्यक्रम में बिरसा मुंडा के वंशज बुद्धराम मुंडा और सिद्धू-कान्हू के वंशज मंडल मुर्मू ने भाग लिया। प्रधानमंत्री ने इसे ऐतिहासिक दिन बताया और स्वच्छता अभियान के लिए जमुई के लोगों की सराहना की।

निष्कर्ष

प्रधानमंत्री का संबोधन न केवल भगवान बिरसा मुंडा की विरासत को सहेजने का संदेश था, बल्कि आदिवासी समाज के समग्र विकास की प्रतिबद्धता भी व्यक्त करता है। बिहार के जमुई में आयोजित यह कार्यक्रम विकास और संस्कृति का प्रतीक बन गया है।

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