फ्लिपकार्ट, अमेजॉन और वॉलमार्ट के ऑनलाइन व्यापार का विरोध
प्रयागराज में व्यापारियों का आक्रोश
दिनांक 24 मई 2025 को इलाहाबाद कंप्यूटर डीलर वेलफेयर एसोसिएशन (ACDWA) के बैनर तले व्यापारियों ने फ्लिपकार्ट, अमेजॉन और वॉलमार्ट के ऑनलाइन व्यापार का विरोध करते हुए प्रदर्शन किया। विरोध का मुख्य कारण इन विदेशी कंपनियों द्वारा भारत के खुदरा बाजार पर 32% तक का कब्जा बताया गया, जिससे छोटे व्यापारियों की आजीविका पर संकट उत्पन्न हो गया है।
स्वदेशी को बढ़ावा, विदेशी कंपनियों का बहिष्कार

इस मौके पर स्वदेशी जागरण मंच की सक्रिय भागीदारी रही। मंच के प्रांतीय परिषद सदस्य डॉ. रंजन वाजपेई ने कहा कि हम दुकानदारों व नागरिकों को जागरूक करेंगे कि वे इन कंपनियों से ऑनलाइन खरीदारी बंद करें।
कार्यक्रम को राष्ट्रीय प्रचार टोली के डॉ. विजय कुमार सिंह, अध्यक्ष अविनाश कुमार, और संयोजक डॉ. अरुण त्रिपाठी ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि ये कंपनियाँ “स्लो पॉइज़न” की तरह भारत की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचा रही हैं।
आत्मनिर्भर भारत की ओर
ACDWA सचिव प्रभात त्रिपाठी ने मांग की कि भारत सरकार ई-कॉमर्स पर एक स्पष्ट नीति बनाए जिससे छोटे और मध्यम व्यवसाय सुरक्षित रह सकें। उन्होंने कहा कि भारत को आत्मनिर्भर बनाना है तो व्यापारियों को संरक्षण देना आवश्यक है।
तुर्की निर्मित वस्तुओं और पर्यटन का भी बहिष्कार
कार्यक्रम में एक और महत्त्वपूर्ण निर्णय लिया गया कि भारतवासी तुर्की और अजरबैजान निर्मित वस्तुओं का बहिष्कार करें। स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सहसंयोजक प्रो. अश्विनी महाजन ने यह स्पष्ट किया कि तुर्की पाकिस्तान की सैन्य सहायता कर रहा है, जबकि भारत ने भूकंप के समय तुर्की की मदद की थी।

उन्होंने कहा कि तुर्की की कृतघ्नता का जवाब आर्थिक बहिष्कार से देना होगा। भारतवासी तुर्की पर्यटन को त्याग कर देश के प्राकृतिक स्थलों की यात्रा करें।
प्रमुख उपस्थित व्यक्ति
कार्यक्रम में कई प्रमुख व्यापारी व कार्यकर्ता उपस्थित रहे:
सौरभ गुप्ता (IPP), अरुण मिश्रा, अतुल यादव, विशाल, विनय, विवेक, अंकित, प्रशांत, शशांक, अभिषेक, अनूप, तथा स्वदेशी जागरण मंच के भूपेंद्र सिंह अजीत तिवारी, संयोजक डॉ. अश्वनी द्विवेदी सहित अनेक कार्यकर्ता।
निष्कर्ष
भारत की आर्थिक रीढ़ — हमारे स्थानीय व्यापारी — आज विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियों के दबाव में हैं। यदि समय रहते इनका ऑनलाइन व्यापार का विरोध नहीं किया गया, तो स्वदेशी व्यवसायों का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। अब समय आ गया है कि भारतवासी स्वदेशी अपनाएं और विदेशी कंपनियों से दूरी बनाए रखें।
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