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भगवान बिरसा मुंडा के 150वीं जयंती समारोह का शुभारंभ: जनजातीय गौरव दिवस पर राष्ट्र ने दी श्रद्धांजलि

भगवान बिरसा मुंडा के 150वीं जयंती समारोह का शुभारंभ
भगवान बिरसा मुंडा के 150वीं जयंती समारोह का शुभारंभ

भारत के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और लोकसभा अध्यक्ष ने आज, 15 नवंबर 2024 को, संसद भवन परिसर में भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर भगवान बिरसा मुंडा के 150वीं जयंती और जनजातीय गौरव दिवस का भव्य शुभारंभ हुआ।

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा ने अपने त्याग और बलिदान से न केवल आदिवासी समुदाय बल्कि पूरे भारत को प्रेरणा दी है।

भगवान बिरसा मुंडा का योगदान

लोक सभा अध्यक्ष ने संसद भवन परिसर में भगवान बिरसा मुंडा को पुष्पांजलि अर्पित की
लोक सभा अध्यक्ष ने संसद भवन परिसर में भगवान बिरसा मुंडा को पुष्पांजलि अर्पित की

भगवान बिरसा मुंडा, जिन्हें “धरती आबा” के नाम से भी जाना जाता है, ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ उलगुलान (क्रांति) का नेतृत्व किया। उनका जीवन और आदर्श आज भी राष्ट्रीय जागरण और जनजातीय एकता का प्रतीक हैं।
15 नवंबर को “जनजातीय गौरव दिवस” के रूप में मनाया जाता है, जो जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को सम्मानित करता है।

लोकसभा अध्यक्ष का संदेश

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा:
“आदिवासी अस्मिता और संस्कृति के गौरव, उलगुलान के प्रणेता, धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा जी की जयंती पर सविनय नमन। जनजातीय गौरव दिवस पर सभी देशवासियों को शुभकामनाएं। भगवान बिरसा के आदर्श हमें प्रेरित करते रहेंगे।”

सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और उत्सव

भगवान बिरसा मुंडा के 150वीं जयंती के अवसर पर संसद भवन परिसर के प्रेरणा स्थल पर विभिन्न राज्यों से आए जनजातीय लोक कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं। इन प्रस्तुतियों ने जनजातीय संस्कृति और धरोहर को उजागर किया।

समारोह में जनजातीय लोक कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं
समारोह में जनजातीय लोक कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं

जनजातीय गौरव दिवस का महत्व

जनजातीय गौरव दिवस भारतीय जनजातीय समुदायों के इतिहास, संस्कृति और स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को सम्मानित करता है। इस दिन देशभर में एकता और गर्व के साथ विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

निष्कर्ष:
भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के इस अवसर पर उनका बलिदान और आदर्श न केवल जनजातीय समुदाय बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा हैं। जनजातीय गौरव दिवस उनकी स्मृति और योगदान को सहेजने का एक प्रयास है।

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