कुंभ मेला

गंगा पंडाल में शास्त्रीय और लोक कला का जादू: महाकुंभ 2025

महाकुंभ 2025 के सेक्टर 1 में स्थित गंगा पंडाल शास्त्रीय और लोक कला की अद्भुत प्रस्तुतियों का साक्षी बना। यहां कलाकारों ने शास्त्रीय संगीत, नृत्य और बांसुरी की जादुई धुनों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

गंगा पंडाल में शास्त्रीय और लोक कला का जादू: महाकुंभ 2025

शास्त्रीय गायन से की शुरुआत

किराने घराने के प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक सोनक चक्रवर्ती ने राग आधारित भजनों से कार्यक्रम की शुरुआत की। उनके भजनों “चलो मन गंगा यमुना तीर” और “जब जानकीनाथ सहाय करें” ने आध्यात्मिक ऊर्जा से पंडाल को भर दिया। सोनक ने भारतीय शास्त्रीय संगीत की उत्कृष्टता को दर्शाया।

गंगा पंडाल में शास्त्रीय गायन से की शुरुआत

भरतनाट्यम और कुचिपुड़ी का जादू

पद्मश्री डॉ. आनंदा शंकर जयंत ने भरतनाट्यम और कुचिपुड़ी नृत्य से मंच को जीवंत कर दिया। “देवी उपासकम” और “शिवोहम” जैसे नृत्य प्रदर्शन ने भारतीय संस्कृति की भव्यता को प्रस्तुत किया।

बांसुरी की धुनों में खो गए श्रोता

राजेन्द्र प्रसन्ना ने राग यमन और बनारसी दादरा में बांसुरी की मधुर धुनों से दर्शकों को कृष्ण-रस में डुबो दिया। “श्याम बजाए वन में मुरलिया” और “रास रचाए गोपियन संग” जैसे गीतों की प्रस्तुति ने समां बांध दिया।

अतिथियों ने सराहा आयोजन

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग के अधिकारी कमलेश कुमार पाठक और डॉ. सुभाष यादव के साथ संस्कृति मंत्रालय की वरिष्ठ सलाहकार गौरी बसु उपस्थित रहीं। उन्होंने इस आयोजन को भारतीय संस्कृति की सच्ची प्रस्तुति बताया।

यह आयोजन शास्त्रीय और लोक कला के संरक्षण के प्रयासों का उदाहरण है, जिसने महाकुंभ 2025 को सांस्कृतिक भव्यता से भर दिया।

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