कल्पवास सात्विक परंपरा पर शब्द-ब्रह्म संगोष्ठी का आयोजन
प्रयागराज। जब गंगा–यमुना के तट पर आस्था, साधना और संस्कृति का सजीव संगम होता है, तब विचार केवल शब्द नहीं रह जाते, बल्कि जीवन-दर्शन का रूप ले लेते हैं। इसी भावभूमि पर उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, प्रयागराज, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा ‘चलो मन गंगा–यमुना तीर’ कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित शब्द-ब्रह्म संगोष्ठी में कल्पवास सात्विक परंपरा और भारतीय जीवन दर्शन पर गहन विमर्श किया गया।
कल्पवास सात्विक परंपरा: जीवन को साधना में रूपांतरित करने की प्रक्रिया

संगोष्ठी में “कल्पवास : सात्विक परंपरा एवं जीवन दर्शन” विषय पर अपने विचार रखते हुए डॉ. अलका प्रकाश ने कहा कि कल्पवास भारतीय अध्यात्म की वह साधना है, जिसमें मनुष्य प्रकृति, संयम और आत्मचिंतन के माध्यम से अपने जीवन को शुद्ध करता है।
उन्होंने कहा कि सादा आहार, सीमित आवश्यकताएँ और ब्रह्ममुहूर्त की साधना मन को विकारों से मुक्त करती है और जीवन को उपभोग नहीं, बल्कि साधना के रूप में देखने की दृष्टि प्रदान करती है।
कल्पवास सात्विक परंपरा में ज्ञान, भक्ति और कर्म का समन्वय
वरिष्ठ लेखक एवं आलोचक डॉ. रविनंदन सिंह ने कहा कि कल्पवास सात्विक परंपरा ज्ञान, भक्ति और आस्था का संतुलित समन्वय है। यह परंपरा सत, रज और तम—तीनों गुणों को संतुलित करते हुए जीवन में रहते हुए आत्मबोध और वीतरागी भाव की अनुभूति कराती है।
उन्होंने इसे चिंतन, मनन और साधना की निरंतर प्रक्रिया बताते हुए भारतीय सांस्कृतिक दृष्टिकोण का महत्वपूर्ण आधार बताया।
गुरुबाणी से सभागार हुआ आध्यात्मिक

कार्यक्रम के दौरान गुरुबाणी खंड में नव ज्योति सिंह (गुरुद्वारा सभा) द्वारा गुरु नानक देव जी की वाणी “एक ओंकार सतनाम…” का भावपूर्ण गायन प्रस्तुत किया गया। इस प्रस्तुति के माध्यम से सत्य, समरसता और ईश्वर की एकात्मकता का संदेश दिया गया, जिससे सभागार आध्यात्मिक भाव से सराबोर हो उठा।
कार्यक्रम से जुड़ी मुख्य जानकारी (Table – SEO Booster)
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| आयोजन स्थल | उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, प्रयागराज |
| कार्यक्रम | शब्द-ब्रह्म संगोष्ठी |
| विषय | कल्पवास सात्विक परंपरा एवं जीवन दर्शन |
| मुख्य वक्ता | डॉ. अलका प्रकाश, डॉ. रविनंदन सिंह |
| आयोजन | संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार |
गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति
कार्यक्रम का संचालन संजय पुरषार्थी ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम सलाहकार कल्पना सहाय द्वारा किया गया। इस अवसर पर मनमोहन सिंह “तन्हा”, अभिलाष नारायण, श्लेष गौतम, अजय मुखर्जी, योगेन्द्र मिश्रा, आभा मधुर सहित अनेक साहित्य प्रेमी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
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