कुंभ मेला

मौनी अमावस्या का अमृत स्नान संपन्न:13 अखाड़ों ने सादगी से लगाई पुण्य डुबकी

प्रयागराज महाकुंभ-2025 के दूसरे अमृत स्नान पर्व का समापन हो गया। मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर संगम तट पर करोड़ों श्रद्धालुओं ने पुण्य की डुबकी लगाई। इस वर्ष अखाड़ों ने विशेष संवेदनशीलता दिखाते हुए पहले श्रद्धालुओं को स्नान करने दिया और उसके बाद स्वयं सांकेतिक स्नान कर परंपरा निभाई।

मौनी अमावस्या का अमृत स्नान संपन्न 13 अखाड़ों ने सादगी से लगाई पुण्य डुबकी

श्रद्धालुओं के लिए अखाड़ों ने दिखाई संवेदनशीलता

महाकुंभ-2025 में मौनी अमावस्या पर अखाड़ों के संतों ने एक नई मिसाल पेश की। सामान्यत: अखाड़े ब्रह्म मुहूर्त में सबसे पहले अमृत स्नान करते हैं, लेकिन इस बार उन्होंने पहले श्रद्धालुओं को स्नान करने का अवसर दिया। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी ने बताया कि यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया ताकि स्थिति सामान्य बनी रहे और सभी श्रद्धालु पुण्य लाभ अर्जित कर सकें।

शंकराचार्यों ने भी किया त्रिवेणी में स्नान

शंकराचार्यों ने भी किया त्रिवेणी में स्नान

महाकुंभ-2025 के इस अमृत स्नान में देश के तीन प्रमुख पीठों के शंकराचार्यों ने भी त्रिवेणी संगम में पुण्य डुबकी लगाई। इनमें श्रृंगेरी शारदा पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी विधु शेखर भारती, द्वारका शारदा पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती और ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती शामिल थे। उन्होंने श्रद्धालुओं से संयम बनाए रखने और धर्म-अनुष्ठानों को शांति से संपन्न करने की अपील की।

मौनी अमावस्या पर संगम में उमड़ा आस्था का महासागर

प्रशासन के अनुसार, मौनी अमावस्या के अवसर पर सायं 6 बजे तक करोड़ों श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी संगम में स्नान किया। पूरे क्षेत्र में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और पुलिस-प्रशासन की मुस्तैदी से स्नान पर्व शांति से संपन्न हुआ।

महाकुंभ-2025 के आगामी प्रमुख स्नान

महाकुंभ-2025 में आगामी प्रमुख स्नान इस प्रकार हैं:

स्नान पर्वतिथि
बसंत पंचमी स्नान3 फरवरी 2025
माघी पूर्णिमा स्नान12 फरवरी 2025
महाशिवरात्रि स्नान26 फरवरी 2025

निष्कर्ष

महाकुंभ-2025 के दूसरे अमृत स्नान में श्रद्धालुओं और अखाड़ों की संयमित भूमिका एक नया आदर्श प्रस्तुत करती है। अखाड़ों द्वारा लिया गया यह निर्णय महाकुंभ की आध्यात्मिकता को और अधिक सशक्त बनाता है। आगामी स्नानों में भी इसी तरह की भव्यता और दिव्यता देखने को मिलेगी।

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