प्रयागराज

प्रयागराज में भगवान शनि देव की भव्य प्राण प्रतिष्ठा, सनातन धर्म की आस्था का पर्व

श्री चित्रगुप्त धाम में विधि-विधान से संपन्न हुआ समारोह

प्रयागराज के सिविल लाइंस स्थित श्री चित्रगुप्त धाम परिसर में आज भगवान शनि देव की भव्य प्राण प्रतिष्ठा वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। यह आयोजन शिवानंद सरस्वती जी के आचार्यत्व में संपन्न हुआ, जिसमें प्रमुख यजमान कायस्थ पाठशाला ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. सुशील सिन्हा एवं उनकी धर्मपत्नी डॉ. रितु सिन्हा ने पूरी श्रद्धा और मनोयोग से पूजन-अर्चन किया।

प्रयागराज में भगवान शनि देव की भव्य प्राण प्रतिष्ठा

शोभायात्रा में भक्तों का उमड़ा जनसैलाब

भगवान शनि देव की मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा के उपरांत, भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इस यात्रा में डीजे, बैंड-बाजा और भक्तों के सुंदर भजनों की गूंज रही। परम पूज्य राम रतन दास जी फलाहारी बाबा ने ध्वज दिखाकर शोभायात्रा का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा—

“पूरी दुनिया में केवल सनातन ही धर्म है, बाकी सभी पंथ मात्र हैं। प्रयागराज का महाकुंभ इसका जीवंत प्रमाण है। सनातन धर्म का डंका पूरे विश्व में बजता रहेगा।”

उन्होंने उन लोगों की आलोचना की जो महाकुंभ के आयोजन को लेकर अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं और कहा कि ऐसे लोग राक्षसी प्रवृत्ति के होते हैं।

भगवान शनि देव: न्याय और सत्य के प्रतीक

डॉ. सुशील सिन्हा ने भगवान शनि देव की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि—

“भगवान शनि देव न्याय के देवता हैं, वे भक्तों को धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। उन्हें सत्य अत्यधिक प्रिय है और वे भक्तों की श्रद्धा से शीघ्र प्रसन्न होते हैं।”

प्रमुख भक्तों की गरिमामयी उपस्थिति

इस पावन अवसर पर कई गणमान्य भक्तों की उपस्थिति रही, जिनमें महामंत्री वीर कृष्ण श्रीवास्तव, उपाध्यक्ष योगेंद्र श्रीवास्तव, गोपी कृष्ण श्रीवास्तव, प्रवीण श्रीवास्तव, डॉ. ऋतुराज श्रीवास्तव, नीरज श्रीवास्तव, अनुपम श्रीवास्तव, पवन श्रीवास्तव, शुभेंदु श्रीवास्तव, मनीष श्रीवास्तव, अरुण श्रीवास्तव सहित अनेक श्रद्धालु शामिल रहे।

समारोह के समापन पर हुआ भंडारा

पूरे विधि-विधान से संपन्न हुए इस आयोजन के उपरांत विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया, जिसमें सभी भक्तों ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

प्रयागराज में भगवान शनि देव की प्राण प्रतिष्ठा सनातन धर्म की अटूट आस्था और श्रद्धा का प्रतीक है। इस भव्य आयोजन ने न केवल श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आनंद दिया, बल्कि सनातन धर्म के प्रति प्रेम और समर्पण को और भी प्रगाढ़ कर दिया।

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