मनोरंजन

उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र शिल्प मेला प्रयागराज में, सांस्कृतिक एकता का प्रदर्शन।

प्रयागराज स्थित उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र द्वारा आयोजित शिल्प मेले की चौथी सांस्कृतिक संध्या में भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपराओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से न केवल दर्शकों का मनोरंजन किया, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक एकता का संदेश भी दिया।

उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र शिल्प मेला प्रयागराज।
उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र शिल्प मेला प्रयागराज। Image Source: NCZCC Media Group

सांस्कृतिक कार्यक्रम की मुख्य प्रस्तुतियां

राज्यप्रस्तुतिकलाकार
उत्तराखंडछपेली नृत्यप्रकाश विष्ट व साथी
महाराष्ट्रलावणी नृत्यश्रद्धा सतविद्कर व दल
कश्मीररऊफ नृत्यकश्मीरी कलाकार
गुजरातगरबा नृत्यवनराज सिंह व दल
तमिलनाडुकड़गम-मयूर नृत्यशिवाजी राव व दल
उत्तर प्रदेशआल्हा गायनशरद अनुरागी व दल

भजन और लोकगीतों की प्रस्तुति

उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र में भजन और लोकगीतों की प्रस्तुति
उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र में भजन और लोकगीतों की प्रस्तुति

प्रयागराज के भजन गायक संजय मित्रा ने भक्ति रस से ओत-प्रोत भजन प्रस्तुत किए। उनकी प्रस्तुति “श्याम रंग रंगा रे” और “मेरा रंग दे बसंती चोला” को दर्शकों ने खूब सराहा।

महोबा से आए शरद अनुरागी और उनके दल ने आल्हा गायन के जरिए महोबा की वीरता और संघर्ष को गीतों में प्रस्तुत किया।

शिल्प मेला: कला और परंपरा का अद्भुत संगम

शिल्प मेला केवल सांस्कृतिक प्रस्तुतियों तक ही सीमित नहीं था, बल्कि यहां हस्तनिर्मित परिधान, टेराकोटा कला, लकड़ी के खिलौने, और सुगंधित इत्र भी प्रदर्शनी का हिस्सा रहे। दर्शकों ने इन परंपरागत कलाओं का भरपूर आनंद लिया।

उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र में लोकगीतों की प्रस्तुति
उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र में लोकगीतों की प्रस्तुति

गरबा नृत्य ने मोहा मन

गुजरात के प्रसिद्ध गरबा नृत्य ने सांस्कृतिक संध्या को ऊर्जा और उत्साह से भर दिया। वनराज सिंह और उनके दल की प्रस्तुति ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।

उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र शिल्प मेला प्रयागराज ने एक बार फिर से भारतीय संस्कृति की विविधता और एकता को प्रदर्शित किया। यह आयोजन न केवल परंपराओं को सहेजने का एक प्रयास है, बल्कि दर्शकों के लिए अद्वितीय सांस्कृतिक अनुभव का भी प्रतीक है।

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