धर्म

छठ पूजा 2024: आस्था, परंपरा और पर्यावरण संरक्षण का पावन पर्व

छठ पूजा 2024 आस्था के साथ डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पण करते श्रद्धालु, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय संरक्षण का प्रतीक।
छठ पूजा 2024 आस्था के साथ डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पण करते श्रद्धालु, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय संरक्षण का प्रतीक।

छठ पूजा का महत्व और पृष्ठभूमि:

छठ पूजा भारत का एक प्रमुख त्यौहार है, खासकर बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में इसे बड़ी श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। इस पूजा में सूर्य देव और छठी मैया की पूजा की जाती है, जो जीवन, स्वास्थ्य, और समृद्धि के प्रतीक माने जाते हैं। छठ पूजा का मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक तत्वों का सम्मान करना और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना है।

छठ पूजा 2024: क्यों है यह खास?

2024 में छठ पूजा का विशेष महत्व है क्योंकि इस वर्ष अधिक से अधिक लोग पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से पारंपरिक तरीकों को अपना रहे हैं। सूर्य उपासना के साथ ही स्वच्छता, जल संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी को भी महत्व दिया जा रहा है। इस वर्ष, कई स्थानों पर कृत्रिम जलकुंडों का निर्माण किया जा रहा है ताकि नदी और तालाबों के जल को सुरक्षित रखा जा सके।

छठ पूजा की परंपराएं और अनुष्ठान

छठ पूजा चार दिनों तक चलने वाला पर्व है, जिसमें कठोर नियमों का पालन किया जाता है। हर दिन के अनुष्ठान का विशेष महत्व होता है:

छठ पूजा 2024 उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पण करते हुए श्रद्धालु, आस्था और प्रकृति के संगम का अनुपम दृश्य।
छठ पूजा 2024 उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पण करते हुए श्रद्धालु, आस्था और प्रकृति के संगम का अनुपम दृश्य।
  • पहला दिन (नहाय-खाय): पूजा का आरंभ शुद्ध जल से स्नान करके और शुद्ध भोजन का सेवन करके होता है।
  • दूसरा दिन (लोहंडा और खरना): इस दिन व्रती बिना नमक का भोजन करते हैं और सूर्यास्त के समय गुड़-चावल की खीर और रोटी का प्रसाद बनाते हैं।
  • तीसरा दिन (संध्या अर्घ्य): इस दिन व्रती डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं।
  • चौथा दिन (प्रातःकालीन अर्घ्य): छठ पूजा का समापन उगते सूर्य को अर्घ्य देकर किया जाता है।

छठ पूजा और पर्यावरण संरक्षण

छठ पूजा के दौरान जलाशयों, नदियों और तालाबों की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है। इस पूजा का संदेश है कि प्रकृति और पर्यावरण का सम्मान करना चाहिए। इस वर्ष छठ पूजा 2024 में, विभिन्न संगठनों और प्रशासन ने पूजा स्थल पर स्वच्छता और प्लास्टिक मुक्त अभियान चलाया है ताकि नदी और जल स्रोतों का संरक्षण किया जा सके।

सामूहिकता और सामाजिक एकता का प्रतीक

छठ पूजा में समाज का हर वर्ग एक साथ जुड़ता है। सामूहिक रूप से अर्घ्य देने के लिए घाटों पर सभी धर्मों और वर्गों के लोग एकत्रित होते हैं। यह पर्व समाज में भाईचारे, समानता और सहयोग का संदेश देता है।

छठ पूजा में क्या होता है प्रसाद का महत्व?

छठ पूजा 2024 बांस की टोकरी में रखे पारंपरिक प्रसाद, जिसमें फल, गन्ना और दीपक शामिल हैं, आस्था और संस्कृति की झलक।
छठ पूजा 2024 बांस की टोकरी में रखे पारंपरिक प्रसाद, जिसमें फल, गन्ना और दीपक शामिल हैं, आस्था और संस्कृति की झलक।

छठ पूजा में प्रसाद का खास महत्व है, जिसमें ठेकुआ, मालपुआ, गन्ना, केला, और विभिन्न मौसमी फलों का उपयोग होता है। प्रसाद को अत्यंत पवित्र और शुद्ध माना जाता है, और इसे व्रती स्वयं तैयार करते हैं।

2024 के छठ पूजा के लिए विशेष तैयारी और आयोजन

2024 में छठ पूजा को और भी भव्य बनाने के लिए विशेष तैयारियां की जा रही हैं। विभिन्न घाटों पर लाइटिंग, सुरक्षा व्यवस्था और जलकुंडों की स्वच्छता का ध्यान रखा जा रहा है। साथ ही, इस वर्ष डिजिटल माध्यमों पर लाइव स्ट्रीमिंग की व्यवस्था भी की गई है, जिससे जो लोग घाटों पर नहीं पहुँच सकते, वे ऑनलाइन पूजा में शामिल हो सकें।

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