कुंभ मेला

गंगा पंडाल में कला, भक्ति और संगीत का दिव्य संगम

महाकुंभ-2025: गंगा पंडाल में कला, भक्ति और संगीत का दिव्य संगम देखने को मिला, जहां जलतरंग से वायलिन तक सुरों की मनमोहक प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस भव्य आयोजन में भारत के प्रख्यात कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से आध्यात्मिक और सांस्कृतिक समागम को साकार किया।

गंगा पंडाल में कला, भक्ति और संगीत का दिव्य संगम

गंगा पंडाल में कार्यक्रम की मुख्य झलकियां

प्रस्तुतिकलाकारविशेषताएँ
जलतरंग पर राग हंसध्वनिपंडित मिलिंद तुलंकरध्वनि की पवित्रता और ऊर्जा का संचार
ओडिसी नृत्य-नाटिका ‘स्नेहमयी गंगा’देबामित्रा सेनगुप्तागंगा अवतरण की पावन कथा का मंचन
**’ओम नमः शिवाय’ **नृत्य प्रस्तुतिगुरु रंजना गौहरशिव के सृजन और संहार का अद्भुत चित्रण
शास्त्रीय संगीत एवं भक्ति रचनाएँपार्वती रवि घंटासालाशिव भजन और गंगा अवतरण की संगीतमय प्रस्तुति
वायलिन वादन पर राग बागेश्वरीसुश्री संगीता शंकरबनारसी होरी और तबला संगत की अनुपम प्रस्तुति

प्रस्तुतियों का संक्षिप्त विवरण

पंडित मिलिंद तुलंकर की जलतरंग प्रस्तुति

कार्यक्रम का शुभारंभ पुणे के प्रसिद्ध जलतरंग वादक पंडित मिलिंद तुलंकर द्वारा राग हंसध्वनि से हुआ, जिसमें जल की पवित्र ध्वनि को सजीव किया गया। तीनताल में प्रस्तुत इस ध्वनि तरंगों ने सभी को आध्यात्मिक अनुभूति से भर दिया।

पंडित मिलिंद तुलंकर की जलतरंग प्रस्तुति

ओडिसी नृत्य में ‘स्नेहमयी गंगा’ की गाथा

प्रसिद्ध नृत्यांगना देबामित्रा सेनगुप्ता की ओडिसी नृत्य-नाटिका ‘स्नेहमयी गंगा’ में ब्रह्म पुराण और वाल्मीकि रामायण के आधार पर गंगा अवतरण की कथा का सजीव मंचन किया गया। इस प्रस्तुति में गंगा संरक्षण का संकल्प लिया गया।

गुरु रंजना गौहर की ‘ओम नमः शिवाय’ नृत्य प्रस्तुति

गुरु रंजना गौहर के निर्देशन में प्रस्तुत ओडिसी नृत्य-नाटिका ‘ओम नमः शिवाय’ में शिव की दिव्यता और सृजन के चक्र को प्रभावशाली तरीके से दिखाया गया। इस प्रस्तुति में पंचतत्वों का अद्भुत समन्वय देखने को मिला।

पार्वती रवि घंटासाला की मंत्रमुग्ध कर देने वाली प्रस्तुति

पार्वती रवि घंटासाला की संगीतमय यात्रा तुलसीदास के शिव भजन से आरंभ हुई और मुत्थुस्वामी दीक्षितर की कर्नाटिक रचना ‘कंचदलायाक्षी’ तक विस्तृत हुई। इस प्रस्तुति में भगवान शिव के डमरू की लय और माँ गंगा के अवतरण की कथा को दर्शाया गया।

वायलिन पर सुश्री संगीता शंकर की संगीतमय प्रस्तुति

सुश्री संगीता शंकर ने अपनी वायलिन प्रस्तुति से दर्शकों को भावविभोर कर दिया। राग बागेश्वरी और बनारसी होरी की रंगत ने संगीत प्रेमियों को आध्यात्मिक रसधारा में बहा दिया। तबले पर अभिषेक के संगम ने इस प्रस्तुति को और प्रभावशाली बना दिया।

गंगा पंडाल में कला, भक्ति और संगीत का दिव्य संगम

गंगा पंडाल में कल की प्रस्तुति का कार्यक्रम

दिनांक: 16 फरवरी 2025 | समय: सायं 4:30 बजे | स्थान: परेड ग्राउंड, सेक्टर 1

कलाकारप्रस्तुति
राहुल देशपांडेहिंदुस्तानी म्यूजिक
श्रीमती स्वप्न सुंदरीशास्त्रीय नृत्य (कत्थक)
रत्नेंद्र भादुड़ीसुगम संगीत
मायसोरे मंजूनाथवायलिन वादन
पट्टाभिराम पंडितकर्नाटिक म्यूजिक
झेलम पराजयओड़िसी नृत्य

सम्मान और समापन

संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश के कार्यक्रम अधिषासी श्री कमलेश कुमार पाठक, नोडल ऑफिसर डॉ. सुभाष चंद्र यादव, और भारत सरकार संस्कृति विभाग सलाहकार गौरी जी ने सभी कलाकारों को अंग वस्त्रम और स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। मंच संचालन शैलेंद्र माधुरी द्वारा किया गया।

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2 thoughts on “गंगा पंडाल में कला, भक्ति और संगीत का दिव्य संगम

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