महाकुंभ-2025 में महामंडलेश्वर पट्टा अभिषेक: स्वामी विज्ञाना नन्द गिरि और स्वामी पुष्पांजलि गिरि को सम्मानित किया गया
महाकुंभ-2025: स्वामी विज्ञाना नन्द गिरि व स्वामी पुष्पांजलि गिरि का महामंडलेश्वर अभिषेक
महाकुंभ-2025 की तैयारियों के बीच निरंजनी अखाड़े की छावनी में एक भव्य और आध्यात्मिक आयोजन संपन्न हुआ। इस आयोजन के दौरान निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज की अध्यक्षता में पंच परमेश्वरों एवं संत महापुरुषों के सानिध्य में स्वामी विज्ञाना नन्द गिरि (ऑस्ट्रेलिया) और स्वामी पुष्पांजलि गिरि (वृंदावन) का पट्टा अभिषेक कर उन्हें महामंडलेश्वर की उपाधि से विभूषित किया गया।

महामंडलेश्वर की उपाधि का आध्यात्मिक महत्व
निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज ने इस अवसर पर कहा कि संत का जीवन भक्ति, ध्यान, साधना और सेवा से परिपूर्ण होता है। संत अपने जीवन में परमात्मा के साथ एक गहरी एकता स्थापित करने का प्रयास करते हैं और समाज के कल्याण के लिए सतत प्रयत्नशील रहते हैं। उन्होंने कहा कि संतों का जीवन लोगों को प्रेरित करने, जीवन के उद्देश्य को समझने और आत्मा के साथ सच्ची आत्मीयता स्थापित करने का होता है। आध्यात्मिक जीवन का मार्ग कठिन हो सकता है, लेकिन संत इसे भक्ति, सत्य, और सेवा के माध्यम से सहज बना देते हैं।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं अन्य संतों के विचार

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं माँ मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री महंत रविंद्र पुरी महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि दीदी माँ साध्वी ऋतम्भरा को अब मदर टेरेसा की तरह ‘मदर ऋतम्भरा’ के नाम से जाना जाए। उन्होंने सनातन धर्म में आस्था के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह व्यक्ति को जीवन के सत्य, ईश्वर और धर्म के प्रति एक गहरी मानसिक और भावनात्मक संबंध स्थापित करने में सहायक होती है।
आनंद पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी बालकानंद गिरि महाराज ने पट्टा अभिषेक की आध्यात्मिक प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि संत महापुरुषों को आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर करने का मार्गदर्शन भी है। उन्होंने कहा कि यह परंपरा अखाड़े के अनुशासन, एकता और गुरु-शिष्य परंपरा को सुदृढ़ करती है और संतों को समाज में उच्च स्थान प्रदान करती है।
नवनियुक्त महामंडलेश्वर का संकल्प
स्वामी विज्ञाना नन्द गिरि और स्वामी पुष्पांजलि गिरि ने महामंडलेश्वर की उपाधि प्राप्त करने के बाद संकल्प लिया कि वे अपने पद की गरिमा और जिम्मेदारियों को पूर्ण निष्ठा और समर्पण के साथ निभाएंगे। उन्होंने संत महापुरुषों का सदा सम्मान करने और सनातन धर्म की सेवा में जीवन समर्पित करने की प्रतिज्ञा की।

अन्य संतों की उपस्थिति
इस शुभ अवसर पर अनेक संत महापुरुष उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से:
- स्वामी युगपुरुष परमानंद जी
- अखाड़े के सचिव श्री महंत राम रतन गिरि
- महामंडलेश्वर स्वामी भास्करानंद
- महामंडलेश्वर स्वामी निरंजन ज्योति
- महंत ओंकार गिरि
- महंत राधे गिरि
- महामंडलेश्वर स्वामी महेश नन्द
- महंत दर्शन भारती
- महामंडलेश्वर स्वामी अन्नपूर्णा भारती
- महंत दिनेश गिरि
- महंत राकेश गिरि
- महंत राज गिरी
इसके अलावा, प्रसिद्ध विद्वान प्रो. दिनेश कुमार गर्ग, प्रो. राम सलाही द्विवेदी, प्रो. शिवशंकर मिश्र आदि भी उपस्थित रहे।
महाकुंभ-2025 के आयोजन के पूर्व संत समाज में इस तरह के कार्यक्रमों का विशेष महत्व है। यह न केवल संत परंपरा को आगे बढ़ाने का कार्य करते हैं बल्कि समाज में आध्यात्मिक जागरूकता भी लाते हैं। महामंडलेश्वर स्वामी विज्ञाना नन्द गिरि और स्वामी पुष्पांजलि गिरि का पट्टा अभिषेक इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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